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रायबरेली ज़िले की स्थापना 1858 में अंग्रेज़ों ने की थी, और इसका नाम इसके मुख्यालय वाले शहर के नाम पर रखा गया है। माना जाता है कि इस शहर की स्थापना ‘भार’ (Bhar) समुदाय के लोगों ने की थी और तब इसे ‘भरौली’ या ‘बरौली’ कहा जाता था, जो समय के साथ बदलकर ‘बरेली’ हो गया। कहा जाता है कि ‘राय’ (Rae) शब्द, शहर से 5 किमी पश्चिम में स्थित ‘राही’ (Rahi) नामक गाँव के नाम का बिगड़ा हुआ रूप है। एक अन्य मान्यता यह भी है कि ‘राय’ शब्द, कायस्थ समुदाय की एक उपाधि है; कायस्थों ने काफी लंबे समय तक इस शहर पर शासन किया था। 8 अगस्त 1942 को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत हुई, जिसमें इस ज़िले ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उस दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं, सामूहिक जुर्माने लगाए गए, लाठीचार्ज हुआ और पुलिस ने गोलियां भी चलाईं। सरेनी (Sareni) में पुलिस ने एक उग्र भीड़ पर गोलियां चलाईं, जिसमें कई लोग मारे गए और कई घायल या अपंग हो गए। ज़िले के लोगों ने ‘व्यक्तिगत सत्याग्रह’ के आह्वान पर पूरे उत्साह के साथ प्रतिक्रिया दी और बड़ी संख्या में लोगों ने गिरफ़्तारियां दीं। अंततः, 15 अगस्त 1947 को देश ने विदेशी गुलामी की बेड़ियों को तोड़ दिया और लंबे इंतज़ार के बाद आज़ादी हासिल की। ​​देश के बाकी हिस्सों की तरह, रायबरेली में भी इस ऐतिहासिक घटना का जश्न मनाया गया और हर घर में खुशी का माहौल था। (स्रोत: रायबरेली ज़िला गजेटियर – https://www.indianculture.gov.in/gazettes/uttar-pradesh-district-gazetteers-rae-bareli)

रायबरेली में स्थित प्रमुख सरकारी औद्योगिक इकाइयों में एनटीपीसी (NTPC) ऊंचाहार, रेल कोच फैक्ट्री लालगंज और इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्री (ITI) शामिल हैं।

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Scenic view of the district highlighting its cultural heritage

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